भयावह सच्चाई: इटली में अंतिम संस्कार भी मुश्किल, ढूंढे नहीं मिल रहे पादरी
 


इटली में कोरोना वायरस की वजह से साढ़े सात हजार से अधिक नागरिकों की मौत हो चुकी है। वहां इस समय लॉकडाउन घोषित किया गया है। बेवजह घर से बाहर निकलने वालों पर भारी जुर्माना तक लगाया जा रहा है। लेकिन इस सबसे दूर एक और भयावह सच्चाई सामने आ रही है।यह कड़वी सच्चाई है इटली के बरगामो शहर की। यहां कोविड-19 से हुई मौतों के बाद लोगों को अपने परिजनों का अंतिम संस्कार करने में भी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। बरगामो के सेक्रेटरी जनरल मोनसिग्नोर गिउलिओ डेलावेइट कहते हैं कि एक पादरी हमेशा लोगों के बीच घिरा रहता है। चाहे कुछ अच्छा हो या फिर कुछ बुरा, उसकी मौजूदगी वहां रहती ही है।


वायरस ने नहीं दिखाया भेदभाव


बता दें कि इटली के बरगामो प्रांत के सूबे में 7 हजार से अधिक लोग कोविड-19 से संक्रमित हो चुके हैं। कातिल कोरोना वायरस से संक्रमित होने से यहां के पादरी भी नहीं बच सके हैं।


स्थानीय कैथोलिक अखबार की रिपोर्ट के मुताबिक सूबे में वायरस की चपेट में आने से करीब 67 पादरियों की मौत हो गई, जिसके बाद बरगामो से 20 पादरी और एक बिशप को बुलाना पड़ा है। ऐसे में समझा जा सकता है कि यहां अंतिम संस्कार करने वाले पादरियों की भी कमी हो गई है।


हालात इस कदर बेकाबू हैं कि ऐसी खबरें आ रही हैं कि पांच लाख की आबादी वाले बरगामो शहर में मेयर जिर्योजियो गोरी ने द्वितीय विश्व युद्ध के बाद पहली बार यहां का एतिहासिक कब्रिस्तान बंद करने का आदेश तक दे दिया है।


...तो खतरे के सामने दूसरी पंक्ति में होते हैं पादरी?


बरगामो प्रांत के अल्बिनो में पैरिश पादरी ग्यूसेप लोकेटेली का कहना है कि उनकी अपना काम और पद छोड़ने की फिलहाल कोई योजना नहीं है। उन्होंने कहा कि कोरोना जैसे खतरे के सामने पादरी हमेशा दूसरी पंक्ति में होते हैं। जबकि पहली पंक्ति में चिकित्सक और नर्स खड़े होते हैं, जो हर रोज यह खतरा उठाते हैं। हम पादरियों पर खतरा मात्रात्मक रूप से थोड़ा कम होता है।


लोकेटेली ने बताया कि उन्होंने कोरोना वायरस के खतरे के बीच हाल ही में एक व्यक्ति का अंतिम संस्कार किया। उस शख्स के घर में उसकी पत्नी और दिव्यांग बेटा ही रह गए हैं और वे अब अकेले हैं। चिकित्सकों और नर्सों की तरह ही पादरियों को भी ऐसे लोगों की सुरक्षा करनी चाहिए।


संक्रमित होने पर भी निभाते रहे फर्ज


लोकेटेली ने कहा कि लेकिन हमारे पादरी भी मौत की नींद सो रहे हैं। क्योंकि वह सामने खड़े खतरे को ठीक ढंग से नहीं भांप रहे हैं। यही वजह है कि हममें से एक 72 वर्ष के ग्यूसेप बेरारडेली भी थे, जो बरगामो के पास कास्निगो के पादारी थे, जिनकी इसी महीने अस्पताल में मौत हो गई थी।


कैस्निगो के एक स्थानीय व्यापारी जियानबटिस्टा गुआरिनी ने कहा कि यह ना जानते हुए कि ये वायरस बहुत खतरनाक है, पादरी बेरारडेली ने अपना काम जारी रखा, वह अंतिम संस्कार के लिए लोगों के घर जाते और फिर वहां से कब्रिस्तान। यहां तक कि जब वह संक्रमित हो गए तब भी उन्होंने अपना काम बंद नहीं किया। 


बता दें कि वायरस से मरने वाले सबसे कम उम्र के पुजारी नेपल्स के दक्षिण में सेलर्नो सूबे के एलेसेंड्रो ब्रिगोन हैं, जो कि महज 45 वर्ष के थे।